ग्रेच्युटी हिसाब

यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) में आपकी ग्रेच्युटी कितनी बनती है?

यूएई लेबर लॉ (फ़ेडरल डिक्री-लॉ 33/2021, आर्टिकल 51) के मुताबिक़ हिसाब: दुबई, अबू धाबी, शारजाह और बाक़ी अमीरात की प्राइवेट कंपनियों के लिए।

नियम आख़िरी बार अक्टूबर 2026 में चेक किए गए
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नौकरी की अवधि

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तनख़्वाह (दिरहम में)

यूएई में ग्रेच्युटी और बची हुई छुट्टियों की रक़म आख़िरी बेसिक तनख़्वाह पर बनती है। अलाउंस सिर्फ़ बाक़ी तनख़्वाह के हिसाब में इस्तेमाल होंगे।
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नौकरी कैसे ख़त्म हो रही है?

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बाक़ी बकाया (वैकल्पिक)

बची हुई छुट्टियों की रक़म बेसिक तनख़्वाह ÷ 30 से, और बाक़ी तनख़्वाह कुल तनख़्वाह ÷ 30 से निकलेगी।
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अपने देश की करेंसी

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यूएई ग्रेच्युटी के नियम एक नज़र में

सर्विसइस्तीफ़े परकंपनी ख़त्म करे या कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हो
1 साल से कमकुछ नहींकुछ नहीं
1 से 5 सालहर साल 21 दिनहर साल 21 दिन
5 साल के बादहर साल 30 दिनहर साल 30 दिन

ग्रेच्युटी आख़िरी बेसिक तनख़्वाह पर बनती है: पहले 5 साल हर साल 21 दिन, और उसके बाद हर साल 30 दिन की तनख़्वाह। साल के अधूरे हिस्से का अनुपात से हिसाब होता है, बिना तनख़्वाह की ग़ैरहाज़िरी के दिन नहीं गिने जाते, और कुल रक़म 2 साल की तनख़्वाह से ज़्यादा नहीं हो सकती।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए आपकी बेसिक तनख़्वाह 3,000 दिरहम है और आप 4 साल बाद इस्तीफ़ा देते हैं। रोज़ की बेसिक मज़दूरी 100 दिरहम, साल के 21 दिन यानी 2,100 दिरहम, और 4 साल की ग्रेच्युटी 8,400 दिरहम बनती है।

अगर आप 7 साल काम करें तो पहले 5 साल के 10,500 और अगले 2 साल के 6,000, यानी कुल 16,500 दिरहम। यूएई में इस्तीफ़ा देने से कोई कटौती नहीं होती।

आम सवाल

क्या यूएई में इस्तीफ़ा देने पर पूरी ग्रेच्युटी मिलती है?

हाँ। फ़रवरी 2022 से लागू नए क़ानून में इस्तीफ़े पर कटौती ख़त्म हो गई है। 1 साल की लगातार सर्विस के बाद आप इस्तीफ़ा दें या कंपनी निकाले, पूरी ग्रेच्युटी मिलती है।

क्या हाउसिंग अलाउंस शामिल होता है?

नहीं। ग्रेच्युटी सिर्फ़ आख़िरी बेसिक तनख़्वाह पर बनती है, हाउसिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे अलाउंस शामिल नहीं होते।

कंपनी को कितने दिन में भुगतान करना होता है?

क़ानून के मुताबिक़ नौकरी ख़त्म होने के 14 दिन के अंदर ग्रेच्युटी समेत सारा बकाया अदा होना चाहिए।

आर्टिकल 44 के तहत बर्ख़ास्तगी पर ग्रेच्युटी मिलती है?

इस पर राय अलग-अलग है। आर्टिकल 51 ग्रेच्युटी को बर्ख़ास्तगी की वजह से नहीं जोड़ता, इसलिए कई वकील कहते हैं कि यह फिर भी बनती है, लेकिन कुछ कंपनियाँ रोक लेती हैं। ऐसी सूरत में मानव संसाधन मंत्रालय (MOHRE) में शिकायत करें या वकील से सलाह लें।

क्या फ़्री ज़ोन (DIFC, ADGM) में भी यही हिसाब है?

नहीं। DIFC और ADGM के अपने नियम हैं, और कुछ कंपनियाँ सरकार की वैकल्पिक सेविंग स्कीम में शामिल हैं जिसमें ग्रेच्युटी की जगह हर महीने जमा रक़म मिलती है। यह कैलकुलेटर आम (मेनलैंड) प्राइवेट कंपनियों के लिए है।

यूएई मानव संसाधन मंत्रालय (MOHRE)