ग्रेच्युटी हिसाब

क़तर में आपकी ग्रेच्युटी कितनी बनती है?

क़तर लेबर लॉ के आर्टिकल 54 और 61 के मुताबिक़ हिसाब। देखें 1 साल पूरा होने पर कितनी रक़म बनती है, और हर महीना कितना जोड़ता है।

नियम आख़िरी बार अक्टूबर 2026 में चेक किए गए
1

नौकरी की अवधि

2

तनख़्वाह (क़तरी रियाल में)

क़तर में ग्रेच्युटी और छुट्टियों की रक़म दोनों बेसिक तनख़्वाह पर बनती हैं (आर्टिकल 72)। अलाउंस सिर्फ़ बाक़ी तनख़्वाह के हिसाब में इस्तेमाल होंगे।
3

नौकरी कैसे ख़त्म हो रही है?

4

बाक़ी बकाया (वैकल्पिक)

सालाना छुट्टियाँ: 1 साल बाद, 5 साल से कम सर्विस पर 3 हफ़्ते और 5 साल के बाद 4 हफ़्ते। छुट्टियों की रक़म बेसिक तनख़्वाह ÷ 30 से, और बाक़ी तनख़्वाह कुल तनख़्वाह ÷ 30 से निकलेगी।
5

अपने देश की करेंसी

1 QAR = PKR
रेट रोज़ बदलता है। आज का रेट चेक करके यहाँ लिख लें।

क़तर ग्रेच्युटी के नियम एक नज़र में

सर्विसइस्तीफ़े परकंपनी ख़त्म करे या कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हो
1 साल से कमकुछ नहींकुछ नहीं
1 साल या ज़्यादापूरीपूरी
आर्टिकल 61 की बर्ख़ास्तगी–कुछ नहीं

ग्रेच्युटी = आख़िरी बेसिक तनख़्वाह ÷ 30 × 21 दिन × सर्विस के साल। क़ानून कम से कम 3 हफ़्ते सालाना कहता है, कॉन्ट्रैक्ट में ज़्यादा हो सकता है। साल के अधूरे हिस्से का भी अनुपात से हिसाब होता है, और कंपनी आपके ज़िम्मे बकाया रक़म (जैसे क़र्ज़) ग्रेच्युटी से काट सकती है।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए आपकी बेसिक तनख़्वाह 4,000 रियाल है और आप 5 साल बाद इस्तीफ़ा देते हैं। रोज़ की बेसिक मज़दूरी 133.33 रियाल, साल के 21 दिन यानी 2,800 रियाल, और 5 साल की ग्रेच्युटी 14,000 रियाल बनती है।

अगर हाउसिंग और ट्रांसपोर्ट मिलाकर आपकी कुल तनख़्वाह 6,000 रियाल भी हो, तब भी ग्रेच्युटी 4,000 बेसिक पर ही बनेगी। और अगर 11 महीने पर नौकरी छोड़ें तो ग्रेच्युटी शून्य है, इसलिए पहला साल ज़रूर पूरा करें।

आम सवाल

क्या क़तर में इस्तीफ़ा देने पर ग्रेच्युटी मिलती है?

हाँ। 1 साल या ज़्यादा सर्विस हो तो इस्तीफ़ा देने पर भी पूरी ग्रेच्युटी मिलती है। सिर्फ़ आर्टिकल 61 के तहत गंभीर ग़लती पर तुरंत बर्ख़ास्तगी में नहीं मिलती।

क्या हाउसिंग अलाउंस शामिल होता है?

नहीं। आर्टिकल 54 के मुताबिक़ ग्रेच्युटी आख़िरी बेसिक तनख़्वाह पर बनती है। अलाउंस शामिल नहीं होते, जब तक कॉन्ट्रैक्ट में कुछ और न लिखा हो।

1 साल से कम सर्विस पर कुछ मिलता है?

ग्रेच्युटी नहीं मिलती। लेकिन काम किए दिनों की तनख़्वाह और बची हुई सालाना छुट्टियों की रक़म फिर भी आपका हक़ है।

21 दिन ही क्यों? मेरे कॉन्ट्रैक्ट में 30 दिन लिखा है।

क़ानून कम से कम 3 हफ़्ते सालाना कहता है और ज़्यादा की इजाज़त देता है। कॉन्ट्रैक्ट में ज़्यादा हो तो वही मिलेगा, इसलिए कैलकुलेटर में दिन बदल सकते हैं। कुछ कंपनियाँ 3 हफ़्ते का हिसाब थोड़ा अलग तरीक़े से लगाती हैं, जिससे मामूली फ़र्क़ आ सकता है।

क्या यह हिसाब सरकारी है?

नहीं, यह अनुमान है। क़ानून के मुताबिक़ कंपनी आपके ज़िम्मे बकाया रक़म ग्रेच्युटी से काट सकती है। पुष्टि के लिए क़तर के श्रम मंत्रालय से संपर्क करें।

ग्रेच्युटी के बारे में आम सवाल

क़तर लेबर लॉ (अल-मीज़ान, सरकारी क़ानूनी पोर्टल)